कहानी
तंजावुर चोलों और बाद में नायकों और मराठों की राजधानी रहा, जिनके दरबारों ने चित्रकारों, धातु-कारीगरों और वाद्य बनाने वालों को सहारा दिया। तंजावुर चित्रकला में सोने की पन्नी और उभरा काम होता है, और आर्ट प्लेट में पीतल, ताँबा और चाँदी का उभरा काम जुड़ता है। सिर हिलाने वाली तंजावुर गुड़िया और कटहल की लकड़ी की वीणा छोटी पारिवारिक वर्कशॉप में बनती हैं। तंजावुर के कई शिल्पों को GI टैग मिला है।
आँकड़ों में
तंजावुर पेंटिंग्स (आवेदन 47), तंजावुर आर्ट प्लेट (63), तंजावुर डॉल (96), तंजावुर वीणा (209) और तंजावुर नेट्टि वर्क्स (423) पंजीकृत GI हैं।
GI Registry — Intellectual Property India (applications 47, 63, 96, 209, 423)
GI टैग
- Thanjavur Paintingsआवेदन संख्या GI Application No. 47 (Certificate No. 32)GI Registry, Intellectual Property India — application 47
- Thanjavur Art Plateआवेदन संख्या GI Application No. 63 (Certificate No. 42)GI Registry, Intellectual Property India — application 63
- Thanjavur Dollआवेदन संख्या GI Application No. 96 (Certificate No. 89)GI Registry, Intellectual Property India — application 96
- Thanjavur Veenaiआवेदन संख्या GI Application No. 209 (Certificate No. 188)GI Registry, Intellectual Property India — application 209
- Thanjavur Netti Worksआवेदन संख्या GI Application No. 423 (Certificate No. 367)GI Registry, Intellectual Property India — application 423
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- तंजावुर आर्ट प्लेट और चित्रों से कॉरपोरेट उपहार
- GI प्रामाणिकता कार्ड के साथ ऑनलाइन बिक्री
- कारीगरों के लिए फ़्रेमिंग, पैकेजिंग और शिपिंग सेवा
- शिल्प कार्यशालाएँ और विरासत पर्यटन
क्लस्टर की मुश्किलें
- छपी हुई सस्ती प्रतियाँ तंजावुर चित्रकला के नाम पर बिकती हैं
- सोने की पन्नी और धातु के बढ़ते दाम
- धीमा, मेहनत वाला काम और कम शिष्य
- कारीगरों की बाज़ार तक सीधी पहुँच कमज़ोर
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →पूजा के पीतल के सामान (मूर्तियाँ, दीये, घंटियाँ) →चश्मे के फ़्रेम और आभूषणों पर सोने की परत (जॉब वर्क) →
