कहानी
बटाला की ढलाई इकाइयाँ और मशीन दुकानें आज़ादी से पहले की हैं, जब यह शहर अविभाजित पंजाब को ढलाई और मशीनें देता था। पारिवारिक कंपनियों ने खराद, शेपर और ड्रिलिंग मशीनें बनाईं और बाद में खेती के औज़ार और ट्रैक्टर पुर्ज़े। सीमा के पास होने और बड़े रेल संपर्क से दूर होने से विकास धीमा रहा। इकाइयाँ आज भी उत्तर भारत के छोटे कारख़ानों और किसानों को माल देती हैं।
आँकड़ों में
ज़िला प्रोफ़ाइल में बटाला मशीन टूल्स और फ़ाउंड्री क्लस्टर, बटाला को ज़िले के निर्माण क्लस्टर बताया गया है।
MSME-DI Ludhiana — Brief Industrial Profile of Gurdaspur District · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ढलाई इकाइयों के लिए पैटर्न बनाना और मशीनिंग जॉब-वर्क
- दूसरे राज्यों में बटाला के औज़ारों का डीलर नेटवर्क
- खेती की मशीनों की मरम्मत और सर्विस
- ट्रैक्टर और पंप कंपनियों के लिए सटीक ढलाई
क्लस्टर की मुश्किलें
- विशेष पैकेज वाले पड़ोसी राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल) से मुकाबला
- बड़े शहरों से सीधा रेल संपर्क नहीं
- छोटी इकाइयाँ थोक में स्टील नहीं ख़रीद पातीं
- बैंक छोटी इकाइयों से गारंटी माँगते हैं
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हाई ड्यूटी आयरन कास्टिंग (ढलाईघर) →मैलिएबल आयरन कास्टिंग (पाइप फ़िटिंग और ऑटो पुर्ज़े) →खेती के औज़ार, छुरी-काँटे और हाथ के औज़ार →CNC इंजीनियरिंग वर्कशॉप (बारीक जॉब वर्क) →कास्ट आयरन ब्रेक ड्रम (छोटी ढलाई इकाई) →
