कहानी
बँटवारे के बाद लुधियाना भारत का साइकिल शहर बना, जब पुर्ज़े बनाने वाली छोटी वर्कशॉप हीरो, एवन और एटलस जैसे बड़े ब्रांड बन गईं। सैकड़ों छोटी इकाइयाँ एक-एक पुर्ज़ा बनाती हैं — तीली, रिम, चेन, सीट — और जोड़ने वाली कंपनियाँ उन्हें पास से ही ख़रीदती हैं, जिससे लागत कम रहती है। इसी इंजीनियरिंग आधार से बाद में शहर का ऑटो-पार्ट्स, सिलाई मशीन और नट-बोल्ट का कारोबार बढ़ा। आज यह क्लस्टर ज़्यादातर देश में बेचता है और अफ़्रीका, एशिया व यूरोप को निर्यात करता है।
आँकड़ों में
देश की कुल साइकिल का 75% और साइकिल पुर्ज़ों का 92% उत्पादन लुधियाना में होता है।
The Tribune — Bicycle industry demands incentive boost from Modi 3.0 to push exports · 2024लुधियाना बाइसिकल एंड इंजीनियरिंग पार्ट्स क्लस्टर SPV में 27 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार ₹270 करोड़।
MSME-DI Ludhiana — Brief Industrial Profile of Ludhiana District · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बड़ी कंपनियों के लिए एक पुर्ज़ा बनाना (तीली, सीट, मडगार्ड, ब्रेक सेट)
- अतिरिक्त लाइन के रूप में इलेक्ट्रिक साइकिल किट, मोटर और बैटरी पैक
- पाउडर कोटिंग, प्लेटिंग और पेंटिंग का जॉब-वर्क
- मर्चेंट निर्यातकों के ज़रिए सस्ती और बच्चों की साइकिल का निर्यात
क्लस्टर की मुश्किलें
- सस्ती चीनी साइकिल और पुर्ज़े
- स्टील के दाम में उतार-चढ़ाव
- छोटे पुर्ज़ा निर्माताओं का कम मुनाफ़ा
- इलेक्ट्रिक साइकिल की ओर बढ़ती माँग के लिए नए हुनर चाहिए
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साइकिल टायर-ट्यूब बनाने की इकाई →इलेक्ट्रोस्टैटिक पाउडर कोटिंग इकाई →स्टील ट्यूब बनाने की इकाई →नट, बोल्ट, वॉशर और रिवेट (लघु इंजीनियरिंग) →मोटरसाइकिल चेन बनाना →
