कहानी
लुधियाना का होज़री कारोबार हाथ से चलने वाली बुनाई मशीनों से शुरू हुआ, जिन पर उत्तर भारत की सर्दी के लिए मोज़े और ऊनी बनियान बनते थे। 1947 के बाद पश्चिमी पंजाब से आए कुशल परिवारों ने पुराने शहर के आसपास बुनाई, रंगाई और सिलाई की इकाइयाँ लगाईं। ऊनी स्वेटरों ने शहर को पहचान दी, और समय के साथ सूती और मिश्रित कपड़े भी बनने लगे, इसलिए अब यह केवल सर्दी का कारोबार नहीं रहा। आज यहाँ छोटी जॉब-वर्क दुकानों से लेकर बड़ी ब्रांडेड कंपनियाँ तक हैं जो पूरे देश में बेचती हैं और निर्यात भी करती हैं।
आँकड़ों में
बुने हुए बाहरी कपड़ों के क्लस्टर में 14,000 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार ₹5,000 करोड़, निर्यात ₹1,000 करोड़ और रोज़गार 4,00,000 लोगों को।
MSME-DI Ludhiana — Brief Industrial Profile of Ludhiana District · 2012देश के लगभग 90 प्रतिशत ऊनी कपड़े लुधियाना का बुनाई उद्योग बनाता है।
FashionUnited — Smuggled Chinese hosiery eat into India's profits · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ऑफ़-सीज़न में स्थापित ब्रांडों के लिए जॉब-वर्क बुनाई, लिंकिंग या सिलाई
- कपड़ा इकाइयों के लिए धागे की रंगाई, कपड़े की प्रोसेसिंग या छपाई की सेवा
- बुनाई इकाइयों को लेबल, पैकिंग, बटन जैसी सामग्री की आपूर्ति
- लुधियाना के बुने कपड़ों का दूसरे राज्यों के दुकानदारों को थोक या ऑनलाइन व्यापार
क्लस्टर की मुश्किलें
- ऊनी कपड़ों की माँग सर्दी की लंबाई और तेज़ी पर टिकी है
- सस्ते आयातित और तस्करी वाले कपड़ों से मुकाबला
- रंगाई इकाइयों पर गंदे पानी के कड़े नियम
- महँगी बिजली और कुशल मज़दूरों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सूती निटेड (होज़री) कपड़ा इकाई →इंटरलॉक (डबल-निट) सूती कपड़ा →सूती बुने (निटेड) कपड़े की ब्लीचिंग और रंगाई (जॉब-वर्क) →सूती धागे की रंगाई (लच्छी और पैकेज रंगाई) →बुने हुए ऊनी मफ़लर →ऊनी बनियान (निटेड वेस्ट) बनाना →बच्चों के ऊनी स्वेटर बुनना →मोज़े (सॉक्स) बुनाई →पुरुषों की टी-शर्ट →ट्रैक सूट सिलाई →पुरुषों के अंतर्वस्त्र (ब्रीफ़, ट्रंक और बनियान) →कंप्यूटराइज़्ड कढ़ाई (जॉब वर्क) →
