कहानी
गोदावरी डेल्टा की नहरों, समतल ज़मीन और खारे पानी ने 1980 के दशक से भीमावरम और आकिवीडु को आंध्र प्रदेश के मत्स्य पालन उछाल का केंद्र बनाया। धान के खेत मछली और झींगा तालाबों में बदले गए, पहले कार्प मछली के लिए और बाद में निर्यात वाले सफ़ेद-पैर (वन्नामेई) झींगे के लिए। तालाबों के आसपास हैचरी, आहार मिलें, प्रसंस्करण संयंत्र और कोल्ड स्टोरेज बने। आज आंध्र प्रदेश पाले गए झींगे और मछली में देश का अग्रणी राज्य है।
आँकड़ों में
2022-23 में भारत के मछली उत्पादन में आंध्र प्रदेश का हिस्सा 41% था, और देश के समुद्री खाद्य निर्यात में इसका हिस्सा 30% से अधिक है।
Andhra Pradesh: state profile (IBEF) · 2026वित्त वर्ष 2026 में आंध्र प्रदेश का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग ₹30,275 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹28,466 करोड़ था।
Andhra Pradesh: state profile (IBEF) · 2026
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- झींगा बीज हैचरी या नर्सरी
- आहार, प्रोबायोटिक और जलकृषि सामग्री की डीलरशिप
- पानी और रोग जाँच लैब
- बर्फ़ संयंत्र, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण
क्लस्टर की मुश्किलें
- झींगों में बीमारी फैलना
- अमेरिकी शुल्क और निर्यात दामों में उतार-चढ़ाव
- एंटीबायोटिक अवशेष के नियम
- खेती की ज़मीन और पानी में खारापन
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मछली पालन (कार्प तालाब) →मछली दाना प्लांट (तैरने वाली गोलियाँ) →फ़्रोज़न मछली इकाई →सूखी झींगा (ड्राइड प्रॉन) इकाई →
