कहानी
चंदेरी के बुनकर कभी 300 काउंट जितना महीन सूती धागा कातते थे, और उनका कपड़ा ढाका की मलमल जितना क़ीमती माना जाता था। 1930 के दशक में उन्होंने ताने में जापानी रेशम लगाना शुरू किया, जिससे आज का पारदर्शी, चमकदार सिल्क-कॉटन कपड़ा बना। ज़्यादातर कपड़ा स्थानीय व्यापारी बेचते हैं, जो बुनकरों को धागा और डिज़ाइन भी देते हैं; बाक़ी राज्य की हथकरघा और हस्तशिल्प एजेंसियाँ बेचती हैं। चंदेरी साड़ी मध्य प्रदेश का पहला पंजीकृत GI है।
आँकड़ों में
UNIDO अध्ययन के अनुसार चंदेरी में 3,659 चालू करघे थे, जिनमें 1,145 सहकारी क्षेत्र में थे; 10,977 लोग सीधे काम करते थे और 10 बुनकर सहकारी समितियाँ चालू थीं।
Brief Industrial Profile of Ashoknagar District (MSME-DI, Ministry of MSME) · 2016प्रोफ़ाइल की क्लस्टर तालिका में 3,572 करघे, ₹25-30 करोड़ का कारोबार और 21,954 लोगों का रोज़गार दर्ज है।
Brief Industrial Profile of Ashoknagar District (MSME-DI, Ministry of MSME) · 2016बने कपड़े का 85 से 90 प्रतिशत स्थानीय व्यापारी बेचते हैं; बाक़ी सरकारी एजेंसियाँ।
Brief Industrial Profile of Ashoknagar District (MSME-DI, Ministry of MSME) · 2016चंदेरी साड़ी 2004-05 में आवेदन संख्या 7 के तहत GI के रूप में पंजीकृत हुई।
Registration Details of Geographical Indications (GI Registry, IP India) · 2026
GI टैग
- Chanderi Sareesआवेदन संख्या GI Application No. 7Registration Details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- चंदेरी साड़ी और कपड़े की सीधी और ऑनलाइन बिक्री
- धागा और रंग की आपूर्ति, कच्चा माल बैंक
- डिज़ाइन सेवाएँ और स्टोल, होम-फ़र्निशिंग जैसे नए उत्पाद
- शिल्प पर्यटन और बुनाई देखने के टूर
क्लस्टर की मुश्किलें
- मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा व्यापारी ले जाते हैं; बुनकर महानगरों में ख़ुद नहीं बेच पाते
- कच्चा माल, रंगाई और पूँजी की ज़रूरत
- चंदेरी के बाहर पावरलूम पर बनी नक़ल
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →शॉल, स्टोल, स्कार्फ़ और रैप →साड़ी रंगाई और छपाई →लोक कला और कला दीर्घा का ऑनलाइन मार्केटप्लेस →क्षेत्रीय ख़ास उत्पादों का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस →
