कहानी
चन्नपट्टण में खिलौने बनाने की परंपरा अठारहवीं सदी की है, जब टीपू सुल्तान ने स्थानीय कारीगरों को सिखाने के लिए फ़ारस से कारीगर बुलाए। कारीगर स्थानीय नरम लकड़ी आले मरा (आइवरी वुड) को खराद पर घुमाते हैं और प्राकृतिक लाख के रंगों से रँगते हैं। यह शहर कर्नाटक का खिलौना नगर कहलाने लगा। चन्नपट्टण खिलौने और गुड़ियों को 2005 में जीआई टैग मिला।
आँकड़ों में
2021 के एक अध्ययन के अनुसार चन्नपट्टण में लगभग 4,000 कारीगर हैं, जो 250 घरों और 50 छोटी निर्माण इकाइयों में काम करते हैं।
Channapatna's traditional artisans toy with modernity (Mongabay India) · 2024
GI टैग
- Channapatna Toys & Dollsआवेदन संख्या GI application no. 23Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- प्राकृतिक रंगों वाले सुरक्षित शैक्षिक खिलौने बनाकर ऑनलाइन बेचें
- कंपनियों के उपहार और रिटर्न गिफ़्ट दें
- बड़े खिलौना ब्रांडों के लिए खराद का जॉब-वर्क करें
- पर्यटकों के लिए शिल्प कार्यशालाएँ चलाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- सस्ते प्लास्टिक और आयातित खिलौने
- आले मरा लकड़ी की कमी
- बिचौलियों का बड़ा हिस्सा
- कारीगरों की कम दैनिक कमाई
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
लकड़ी के खिलौने बनाना (लाख वाले खराद खिलौने) →लकड़ी के खिलौने और सजावटी सामान →स्थानीय हस्तशिल्प और खिलौना बनाने का स्कूल →लाख उत्पादन →
