कहानी
रामनगर, कनकपुरा, मागडी और चन्नपट्टण तालुकों के किसान पीढ़ियों से शहतूत पर रेशम के कीड़े पालते आए हैं। रामनगर शहर का सरकारी कोकून बाज़ार एशिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक बना, जहाँ किसान खुली नीलामी में रीलरों को कोकून बेचते हैं। शहर और आसपास की रीलिंग इकाइयाँ कोकून से कच्चा रेशम बनाकर बेंगलुरु, मैसूरु और कांचीपुरम के बुनकरों को भेजती हैं। अब यह बाज़ार ई-नीलामी से चलता है।
आँकड़ों में
रामनगर में लगभग 10,000 रेशम पालक ई-नीलामी के ज़रिये रोज़ औसतन 45,000 से 50,000 किलो रेशम कोकून बेचते हैं।
Silk Industry in India: The Story Behind the Sheen (TERI) · 2021
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- मल्टी-एंड या ऑटोमैटिक रेशम रीलिंग इकाई लगाएँ
- किसानों को चॉकी (छोटे कीड़े) पालन सेवा दें
- बुनाई केंद्रों को कच्चे रेशम का व्यापार करें
- रेशम कचरे और प्यूपा से उत्पाद बनाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- कोकून के दामों में उतार-चढ़ाव
- कीट और रेशम कीड़ों की बीमारियाँ
- चीन से आयातित कच्चा रेशम
- पानी और मज़दूरों की कमी
