कहानी
पुराने मैसूर राज्य में बीसवीं सदी की शुरुआत में स्थानीय चंदन, वन राल और फूलों से अगरबत्ती बनाने का काम बढ़ा। मैसूरु और बेंगलुरु के पारिवारिक कारोबारों ने राष्ट्रीय ब्रांड बनाए, जबकि हाथ से बत्ती बेलना बहुत-सी महिलाओं का घर बैठे काम बन गया। उद्योग का संगठन 1949 में मैसूर ऊदबत्ती मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन के रूप में शुरू हुआ। मैसूर अगरबत्ती को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
भारत के सभी अगरबत्ती निर्माताओं में से साठ प्रतिशत से अधिक कर्नाटक में हैं।
Bitter Ashes: the exploitative practices of the agarbatti industry (The Caravan) · 2019
GI टैग
- Mysore Agarbathiआवेदन संख्या GI application no. 13 & 18Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ब्रांडों को कच्ची अगरबत्ती देने वाली मशीन इकाई शुरू करें
- अगरबत्ती के लिए बाँस की तीली बनाएँ
- सुगंध और परफ़्यूम मिश्रण
- पैकेजिंग और अपना ब्रांड
क्लस्टर की मुश्किलें
- घर पर बत्ती बेलने वालों की कम मज़दूरी
- धूल और रसायनों से स्वास्थ्य जोखिम
- कच्ची तीलियों का आयात
- कम मुनाफ़ा और बहुत सारे छोटे ब्रांड
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
अगरबत्ती बनाना →अगरबत्ती बनाने की इकाई →अगरबत्ती के लिए बाँस की तीलियाँ →परफ़्यूम (इत्र) निर्माण →
