कहानी
मैसूर के महाराजा ने 1912 में स्विट्ज़रलैंड से मशीनें मँगाकर मैसूरु में रेशम बुनाई कारख़ाना खोला। पुराने मैसूर क्षेत्र में टीपू सुल्तान के समय से शहतूत उगाया जाता था और रेशम के कीड़े पाले जाते थे, इसलिए कच्चा रेशम पास ही मिलता था। 1980 में यह कारख़ाना राज्य सरकार की कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज़ कॉर्पोरेशन (KSIC) को सौंपा गया। आज भी कर्नाटक शहतूत रेशम में देश का अग्रणी राज्य है और मैसूर सिल्क को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
डीसी-एमएसएमई ने मैसूरु रेशम को कर्नाटक के पहचाने गए एमएसई क्लस्टरों में गिना है।
Karnataka State Industrial Profile 2015-16 (MSME-DI Bengaluru, DC-MSME) · 2016भारत में बनने वाले कुल रेशम का लगभग 70% शहतूत रेशम है, और शहतूत रेशम उत्पादन में कर्नाटक सबसे आगे है।
Silk Industry in India: The Story Behind the Sheen (TERI) · 2021
GI टैग
- Mysore Silkआवेदन संख्या GI application no. 11Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Mysore Silk (Logo)आवेदन संख्या GI application no. 532Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- जीआई टैग वाली रेशमी साड़ियों की दुकान या ऑनलाइन बिक्री
- साड़ी घरानों के लिए बुनाई, धागा बटाई या रंगाई का जॉब-वर्क
- साड़ी फ़िनिशिंग, रोलिंग और पॉलिशिंग सेवा
- स्टोल और टाई जैसे रेशमी सामान
क्लस्टर की मुश्किलें
- सस्ती नकली और पावरलूम साड़ियाँ
- कच्चे रेशम की बढ़ती क़ीमत
- युवाओं का बुनाई छोड़ना
- असली जीआई और सिल्क मार्क लेबल की ज़रूरत
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →साड़ी रंगाई और छपाई →ज़री और सिल्क कढ़ाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
