कहानी
नामक्कल में 1950 के दशक से लॉरी की बॉडी बन रही है, जब स्थानीय मिस्त्री ट्रक के चेसिस पर लकड़ी और इस्पात की बॉडी लगाने लगे। ज़िला भारत के सबसे ज़्यादा लॉरी रखने वाले इलाक़ों में भी शामिल हुआ, इसलिए माँग पास में ही थी। बॉडी बनाने वाले, वेल्डर, पेंटर और पुर्ज़ों के डीलर मिलकर तिरुचेंगोडे तक फैला क्लस्टर बन गए। दूसरे राज्यों के ख़रीदार भी चेसिस यहाँ बॉडी लगवाने लाते हैं।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- फ़ैब्रिकेशन जॉब-वर्क: चेसिस बढ़ाना, लोड बॉडी, टिपर हाइड्रोलिक्स
- टैंकर और रेफ़्रिजरेटेड बॉडी बनाना
- पुर्ज़े, पेंट और एक्सेसरी का व्यापार
- लॉरी बेड़ों की मरम्मत और नवीनीकरण
क्लस्टर की मुश्किलें
- बॉडी-कोड (AIS-093) का पालन और मंज़ूरी
- इस्पात के दामों में उतार-चढ़ाव
- ट्रक कंपनियों का फ़ैक्टरी-निर्मित बॉडी की ओर झुकाव
- कुशल वेल्डरों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
बस और ट्रक बॉडी निर्माण →रेफ़्रिजरेटेड ट्रक बॉडी बनाना →ट्रक और हल्के व्यावसायिक वाहनों की लीफ़ स्प्रिंग →सटीक शीट-मेटल फ़ैब्रिकेशन (जॉब शॉप) →
