कहानी
पुरानी दिल्ली के बाज़ार 1650 के दशक में शाहजहाँ के बसाए चारदीवारी शहर के समय के हैं, जब चाँदनी चौक उसका मुख्य बाज़ार बना। पश्चिमी छोर पर खारी बावली मसाले और सूखे मेवों का बाज़ार बनी, जो उत्तर भारत की किराना दुकानों को माल देती है। पुराने शहर के बाहर सदर बाज़ार घरेलू सामान, खिलौनों और स्टेशनरी का थोक केंद्र बना। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के व्यापारी यहाँ माल ख़रीदने आते हैं, और कई दुकानें पीढ़ियों से एक ही परिवार चलाता है।
आँकड़ों में
सदर बाज़ार में 15,000 से ज़्यादा दुकानें और 82 छोटे बाज़ार हैं।
The Daily Pioneer — Sadar Bazaar lacks basic infrastructure · 2019
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- यहाँ से थोक ख़रीदकर छोटे शहरों की किराना और गिफ़्ट दुकानों को देना
- खारी बावली से ख़रीदे मसाले या मेवों की पैकिंग और ब्रांडिंग
- व्यापारियों के लिए आख़िरी छोर तक डिलीवरी और कुली सेवा
- पुरानी दिल्ली के व्यापारियों के नियमित ख़रीदारों के लिए ऑनलाइन B2B ऑर्डर
क्लस्टर की मुश्किलें
- भीड़, पार्किंग और माल चढ़ाने-उतारने की दिक़्क़त
- पुरानी इमारतों में ख़राब सफ़ाई और आग से सुरक्षा
- दुकानदारों के लिए ऑनलाइन थोक प्लेटफ़ॉर्म का मुकाबला
- सुरक्षा घटनाओं से ग्राहकों का घटना
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मसाला / स्पाइस ग्राइंडिंग यूनिट →सूखे मेवों की दुकान →भुने हुए सूखे मेवे →निर्माण सामग्री का व्यापार →बर्तन और रसोई सामान की दुकान →कपड़ों की खुदरा दुकान (रेडीमेड गारमेंट शोरूम) →
