कहानी
दिल्ली के कृषि उपज विपणन क़ानून के तहत 1977 में आज़ादपुर मंडी बनी, ताकि फल-सब्ज़ी का थोक व्यापार भीड़ भरे पुराने शहर से बाहर आए। हिमाचल, कश्मीर, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण से ट्रक हर रात यहाँ माल उतारते हैं, और आढ़ती उसे थोक और खुदरा व्यापारियों को नीलाम करते हैं। यह मंडी उत्तर भारत में कई फ़सलों के दाम तय करती है। भीड़ के कारण टीकरी में दूसरी मंडी की योजना बनी है।
आँकड़ों में
आज़ादपुर में सामान्य दिनों में रोज़ 15,000 टन सब्ज़ी आती है, जो लॉकडाउन में घटकर 9,000–10,000 टन रह गई।
Hindustan Times (via PressReader) — Sale tokens, shifting bazars to aid mandi crowd control · 20201998-99 में आज़ादपुर मंडी में सालाना आवक 35.84 लाख टन रही।
Delhi Economic Survey 1999-2000, Chapter 20 · 2000
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- व्यापारियों के लिए छँटाई, श्रेणी और पैकिंग सेवा
- मंडी से दुकानों और रेस्तराँ तक ठंडी ढुलाई
- होटलों और क्लाउड किचन को फल-सब्ज़ी की आपूर्ति
- केले और आम पकाने के चैंबर
क्लस्टर की मुश्किलें
- भारी भीड़ और बर्बादी
- आढ़त और ढुलाई के ख़र्च
- मौसम और आवक से दाम में उतार-चढ़ाव
- मंडी को हटाने या बाँटने की योजनाएँ
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ताज़े फल और सब्ज़ी की दुकान →कोल्ड रूम (2 × 10 MT) फल-सब्ज़ी के लिए →कोल्ड स्टोरेज (आलू, 2000 टन) →जैविक सब्ज़ी निर्यात व्यवसाय →फल और सब्ज़ी कैनिंग इकाई (आम का गूदा, तरी वाली सब्ज़ियाँ) →
