कहानी
पिपिली की एप्लिक कला मंदिर सेवा से शुरू हुई, जिसमें रथ यात्रा समेत जगन्नाथ मंदिर के उत्सवों के लिए चंदोवे, छतरियाँ और झंडे बनते थे। कारीगर रंगीन कपड़े से जानवरों, फूलों और देवताओं की आकृतियाँ काटकर आधार कपड़े पर सिलते हैं। भुवनेश्वर–पुरी राजमार्ग पर बसा यह गाँव अब पर्यटकों और निर्यातकों को बेचता है, और यह शिल्प GI पंजीकृत है।
आँकड़ों में
पिपिली एप्लिक क्लस्टर में 117 चालू इकाइयाँ, ₹50 करोड़ का कारोबार, ₹8 करोड़ का निर्यात और 1,700 लोगों का रोज़गार था।
Brief Industrial Profile of Puri District, MSME-DI Cuttack, Ministry of MSME · 2012
GI टैग
- Pipli Applique Workआवेदन संख्या Application No. 86 & 108Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ऑनलाइन और निर्यात ख़रीदारों के लिए आधुनिक एप्लिक घरेलू सजावट
- होटलों और आयोजनों के लिए थोक ऑर्डर
- कारीगरों को रंगा कपड़ा और किनारी सप्लाई करें
क्लस्टर की मुश्किलें
- राजमार्ग पर मशीन से बनी सस्ती नकल
- कारीगरों की कम मज़दूरी
- डिज़ाइन में नयापन कम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
पैचवर्क कपड़ा और परिधान →कपड़े के मेड-अप्स (नैपकिन, मैट, एप्रन) →लोक कला और कला दीर्घा का ऑनलाइन मार्केटप्लेस →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
