कहानी
तालचेर कोयला क्षेत्र से अंगुल को सस्ता ईंधन मिला, जिसने 1980 के दशक में नेशनल एल्युमिनियम कंपनी का स्मेल्टर और कैप्टिव बिजलीघर यहाँ खींचा। इसके बाद ताप बिजलीघर, स्टील प्लांट और उर्वरक इकाइयाँ आईं और यह पट्टी ओडिशा के मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों में बन गई। छोटी फ़ैब्रिकेशन और इंजीनियरिंग इकाइयाँ बड़े प्लांटों को सेवा देती हैं।
आँकड़ों में
नाल्को का अंगुल, ओडिशा में 4.60 लाख टन प्रति वर्ष का एल्युमिनियम स्मेल्टर और 1,200 मेगावाट का कैप्टिव बिजलीघर है।
NALCO Corporate Brochure (November 2019), National Aluminium Company Ltd · 2019अंगुल स्मेल्टर की क्षमता 1987 में 2.18 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़कर 3.45 लाख टन (2003-04) और फिर 4.6 लाख टन (2009-10) हुई।
CAG Report No. 6 of 2019, Chapter 3: Smelter and Captive Power Plant of NALCO · 20192010-11 में अंगुल ज़िले में 5,75,33,000 टन कोयला उत्पादन हुआ।
Brief Industrial Profile of Angul District, MSME-DI Cuttack, Ministry of MSME · 2012अंगुल के इंजीनियरिंग क्लस्टर में 20 चालू इकाइयाँ, लगभग ₹3.6 करोड़ का कारोबार और 180 लोगों का रोज़गार था।
Brief Industrial Profile of Angul District, MSME-DI Cuttack, Ministry of MSME · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- एल्युमिनियम के आगे के उत्पाद: कंडक्टर, एक्सट्रूज़न, फ़ॉयल
- स्मेल्टर और बिजलीघरों के फ़ैब्रिकेशन और रखरखाव ठेके
- बिजलीघर की राख से फ़्लाई-ऐश ईंटें
- कोयले और धातु की ढुलाई और लॉजिस्टिक्स
क्लस्टर की मुश्किलें
- वायु प्रदूषण और फ़्लाई-ऐश निपटान
- भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की समस्याएँ
- कुछ बड़े ख़रीदारों पर निर्भरता
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
एल्युमिनियम कंडक्टर (AAC, AAAC, ACSR) →एल्युमिनियम ढलाई (फ़ाउंड्री) →एल्युमिनियम फ़ैब्रिकेशन (दरवाज़े, खिड़कियाँ, रेलिंग) →एल्युमिनियम फ़ॉइल कंटेनर →फ्लाई ऐश ईंट यूनिट →भारी फ़ैब्रिकेशन (टंकियाँ, प्रेशर वेसल, पाइपिंग) →
