कहानी
पश्चिमी ओडिशा के मेहर समुदाय के बुनकरों ने 'बंधा' कला विकसित की, जिसमें बुनाई से पहले धागे को बाँधकर डिज़ाइन में रंगा जाता है। बरगढ़, संबलपुर और सोनपुर के गाँवों में हज़ारों करघे हैं, जिनमें से कई बुनकर सहकारी समितियों में संगठित हैं। संबलपुरी बंधा और बोमकाई साड़ियाँ GI पंजीकृत हैं और बोयनिका व निजी व्यापारियों के ज़रिए बिकती हैं।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Sambalpuri Bandha Saree & Fabricsआवेदन संख्या Application No. 208Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Bomkai Saree & Fabricsआवेदन संख्या Application No. 217Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Orissa Ikatआवेदन संख्या Application No. 22Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- संबलपुरी साड़ियाँ और इकत कपड़ा ऑनलाइन और बुटीक को बेचें
- करघे से पहले की सेवाएँ: धागा रंगाई और टाई-डाई डिज़ाइन
- बुने कपड़े से इकत परिधान और घरेलू वस्त्र बनाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- इकत की पावरलूम और छपी हुई नकल
- कम मज़दूरी से युवा बुनकरों का दूर होना
- धागे के बढ़ते दाम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →साड़ी रंगाई और छपाई →कपड़े के मेड-अप्स (नैपकिन, मैट, एप्रन) →हथकरघा गमछा →
