कहानी
स्वामीमलै के स्थपति अपने हुनर को चोल काल से जोड़ते हैं, जब कावेरी डेल्टा के बड़े मंदिरों के लिए कांस्य मूर्तियाँ ढाली जाती थीं। मोम-ढलाई विधि के साँचे के लिए कावेरी नदी की मिट्टी का इस्तेमाल होता है। हर मूर्ति पहले मोम में बनती है, उस पर मिट्टी चढ़ती है, मोम पिघलाकर निकाला जाता है और पिघली धातु भरी जाती है, फिर हाथ से तराशी जाती है। मूर्तियाँ भारत और विदेश के मंदिरों और संग्रहकर्ताओं के लिए बनती हैं।
आँकड़ों में
स्वामीमलै में विश्वकर्मा समुदाय के लगभग 2,000 कारीगर कांस्य मूर्तियाँ बनाते हैं, और मूर्तियाँ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जाती हैं।
Hands create gods — Deccan Heraldस्वामीमलै ब्रॉन्ज़ आइकॉन्स पंजीकृत GI है (आवेदन 64, प्रमाणपत्र 67)।
GI Registry — Swamimalai Bronze Icons, application 64
GI टैग
- Swamimalai Bronze Iconsआवेदन संख्या GI Application No. 64 (Certificate No. 67)GI Registry, Intellectual Property India — application 64
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- प्रमाणित मंदिर कांस्य मूर्तियों का ऑनलाइन निर्यात
- प्रमुख स्थपतियों के लिए मोम मॉडलिंग और फ़िनिशिंग जॉब-वर्क
- उपहार और होटलों के लिए छोटे सजावटी कांस्य
- शिल्प पर्यटन और आगंतुकों के लिए कार्यशालाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- ताँबे और पीतल के बढ़ते दाम
- नक़ली और मशीन से ढली प्रतियाँ
- पुरावशेष जाँच के लिए निर्यात कागज़ी काम
- कम युवा कारीगर
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
पूजा के पीतल के सामान (मूर्तियाँ, दीये, घंटियाँ) →अलौह धातु कास्टिंग फ़ाउंड्री (पीतल, काँसा, गन मेटल) →इन्वेस्टमेंट कास्टिंग (लॉस्ट वैक्स विधि) →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
