कहानी
बिदरी शिल्प पंद्रहवीं सदी में बहमनी राज्य की राजधानी बीदर में फ़ारसी धातु-जड़ाई परंपरा से फला-फूला। कारीगर जस्ता-ताँबे की मिश्र धातु ढालते हैं, उस पर नक़्क़ाशी करते हैं, चाँदी का तार जड़ते हैं और फिर बीदर क़िले की मिट्टी के लेप से आधार को काला करते हैं। यह कला ज़्यादातर बीदर की बिदरी कॉलोनी में परिवारों के भीतर सिखाई जाती है। बिदरी शिल्प को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
बीदर में लगभग 150 पंजीकृत बिदरी कारीगर हैं।
Exploring Bidriware, India's black magic (Gulf News) · 2022
GI टैग
- Bidriwareआवेदन संख्या GI application no. 20Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बिदरी उपहार और आभूषण ऑनलाइन और कंपनियों को बेचें
- पेन, कफ़लिंक और दीवार सजावट जैसे नए डिज़ाइन बनाएँ
- कारीगरों को चाँदी का तार और मिश्र धातु सप्लाई करें
- बीदर क़िला यात्राओं के साथ शिल्प पर्यटन
क्लस्टर की मुश्किलें
- घटता निर्यात और ख़रीदारों की रुचि
- चाँदी की बढ़ती क़ीमत
- कम युवा यह कला सीख रहे हैं
- सस्ती नक़ल
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
धातु हस्तशिल्प यूनिट →हस्तशिल्प आभूषण इकाई →पीतल (धातु) आभूषण निर्माण →
