कहानी
चेन्नई का ऑटो उद्योग आज़ादी के बाद अशोक लेलैंड, TVS और स्टैंडर्ड मोटर्स से शुरू हुआ, जिसे इंजीनियरिंग कॉलेजों और चेन्नई बंदरगाह का सहारा मिला। 1990 के दशक के मध्य से विदेशी कार कंपनियों ने श्रीपेरुंबुदूर–ओरगडम और मरैमलै नगर में बड़े कारखाने लगाए, और उनके पीछे सैकड़ों आपूर्तिकर्ता आए। बंदरगाह के कारण चेन्नई भारत का मुख्य कार-निर्यात केंद्र बना। अब यह पट्टी बिजली वाहन और बैटरी कारखाने जोड़ रही है।
आँकड़ों में
राज्य की निवेश एजेंसी के अनुसार भारत के लगभग 35% ऑटो पुर्ज़े, लगभग 36% दोपहिया, 25% चारपहिया और लगभग 40% टायर तमिलनाडु में बनते हैं।
Automobile, Auto Components & EV — Guidance Tamil Nadu (Investing in Tamil Nadu)SIAM के हवाले से तमिलनाडु के पास भारत की लगभग 20% वाहन उत्पादन क्षमता और 21% ऑटोमोबाइल निर्यात था (2015)।
Chennai aka Detroit of India — The Auto Channel (citing SIAM) · 2015
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- टियर-2/टियर-3 आपूर्ति: मशीनिंग, शीट मेटल, रबर और प्लास्टिक पुर्ज़े
- टूलिंग, डाई, फ़िक्स्चर और जिग
- बिजली वाहन के पुर्ज़े, वायरिंग हार्नेस और बैटरी-पैक असेंबली
- बंदरगाह के पास लॉजिस्टिक्स, गोदाम और वाहन-निर्यात सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- वाहन कंपनियों की कड़ी गुणवत्ता और लागत माँगें
- बिजली वाहनों से इंजन के कुछ पुर्ज़े बेकार हो रहे हैं
- पट्टी में ज़मीन महँगी और लंबा सफ़र
- आपूर्ति श्रृंखला में देर से भुगतान
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ऑटोमोबाइल गियर निर्माण →ऑटोमोबाइल पिस्टन निर्माण →ऑटोमोबाइल कंट्रोल केबल →ऑटोमोटिव एयर फ़िल्टर निर्माण →ब्रेक शू निर्माण →ऑटो क्लच प्लेट असेंबली →वाहनों के अल्टरनेटर →रबर-बॉन्डेड इंजन माउंटिंग इकाई →
