कहानी
तापी घाटी के रावेर, यावल और चोपडा तालुकों में केले की खेती फैली, जहाँ गहरी काली मिट्टी और कुएँ का पानी इस फ़सल के अनुकूल है। जलगाँव के केले रेल और ट्रक से उत्तर भारत जाते हैं, और यह ज़िला भारत के सबसे बड़े केला क्षेत्रों में से एक बना। जलगाँव की जैन इरिगेशन द्वारा बढ़ाई गई ड्रिप सिंचाई और टिशू-कल्चर पौधों से पैदावार बढ़ी। जलगाँव केले को 2016 में GI टैग मिला।
आँकड़ों में
जलगाँव महाराष्ट्र का प्रमुख केला उत्पादक ज़िला है, जहाँ 50,000 हेक्टेयर में केला लगा है।
TNAU Agritech Portal – Banana tissue culture (Jain Irrigation)जलगाँव केला पंजीकृत GI है (आवेदन संख्या 498, प्रमाणपत्र संख्या 281, दिनांक 30-11-2016); आवेदक निसर्गराजा कृषि विज्ञान केंद्र है।
GI Registry (IP India) – Application No. 498, Jalgaon Banana · 2016
GI टैग
- Jalgaon Bananaआवेदन संख्या GI Application No. 498, Certificate No. 281 (30-11-2016)GI Registry (IP India) – Application No. 498, Jalgaon Banana
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- उपभोक्ता शहरों के पास केला पकाने के कक्ष
- केले के चिप्स, पाउडर, आटा और शिशु आहार
- केले का रेशा निकालना और हस्तशिल्प उत्पाद
- टिशू-कल्चर नर्सरी और हार्डनिंग इकाइयाँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- लू और आँधी से पौधों को नुक़सान
- दामों में उतार-चढ़ाव और व्यापारियों पर निर्भरता
- पनामा विल्ट और CMV जैसे रोग
- निर्यात-स्तर की हैंडलिंग कम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
टिश्यू कल्चर केले की खेती →केले के चिप्स →केला पाउडर इकाई →केला पकाने का चैंबर →केले के रेशे निकालने की यूनिट →पौधों की टिशू कल्चर प्रयोगशाला →
