कहानी
किन्हाल शिल्प विजयनगर साम्राज्य से जुड़ा है, जिसके कारीगर मंदिरों और त्योहारों के लिए नक़्क़ाशीदार और रंगी लकड़ी की आकृतियाँ बनाते थे। किन्हाल गाँव का चित्रगार समुदाय आज भी हल्की स्थानीय लकड़ी तराशकर चमकीले प्राकृतिक रंगों से रँगता है। इनका काम मंदिर रथों में और सजावटी खिलौनों के रूप में इस्तेमाल होता है। किन्हाल खिलौनों को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Kinhal Toysआवेदन संख्या GI application no. 213Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- मंदिरों और संग्रहकर्ताओं को किन्हाल आकृतियाँ बेचें
- घर सजावट और उपहार उत्पाद
- हम्पी यात्राओं से जुड़ा शिल्प पर्यटन
क्लस्टर की मुश्किलें
- बहुत कम सक्रिय कारीगर परिवार
- सही लकड़ी की कमी
- बाज़ार तक कमज़ोर पहुँच
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
लकड़ी के खिलौने बनाना (लाख वाले खराद खिलौने) →लकड़ी के खिलौने और सजावटी सामान →लकड़ी नक्काशी इकाई (फ़ोटो फ़्रेम) →
