कहानी
सेलम, नामक्कल, धर्मपुरी और ईरोड की सूखी ज़मीन पर टैपिओका अच्छा उगता है। 1940 के दशक से सेलम की छोटी इकाइयाँ टैपिओका की जड़ों से साबूदाना और स्टार्च बनाने लगीं, मुख्यतः उत्तर भारत के ख़रीदारों के लिए, जहाँ व्रत में साबूदाना खाया जाता है। 1981 में निर्माताओं ने सागोसर्व नाम की सहकारी संस्था बनाई, जो नीलामी, गोदाम और गुणवत्ता जाँच चलाती है। सेलम साबूदाना को 2023 में GI टैग मिला।
आँकड़ों में
1981 में बनी सागोसर्व (सेलम स्टार्च एंड सागो मैन्युफ़ैक्चरर्स सर्विस इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसाइटी) के 334 पंजीकृत सदस्य निर्माता हैं।
First GI-tagged Salem Sago export to Canada: APEDA — Indian Cooperativeसेलम ज़िले की लगभग 387 टैपिओका प्रोसेसिंग इकाइयाँ सागोसर्व की सदस्य हैं (2017 का अध्ययन)।
Study on tapioca processing units in Salem district — IJCMAS (V. Kathiravan et al.) · 2017सेलम सागो (जव्वरिसि) पंजीकृत GI है (आवेदन 711, प्रमाणपत्र 461)।
GI Registry — Salem Sago (Javvarisi), application 711सेलम का स्टार्च और साबूदाना क्लस्टर साझा सुविधा केंद्र MSE-CDP के तहत पूरा हुआ बताया गया है।
Completed Common Facility Centres under MSE-CDP (as on 22 Mar 2024), Office of DC-MSME · 2024
GI टैग
- Salem Sago (Javvarisi)आवेदन संख्या GI Application No. 711 (Certificate No. 461)GI Registry, Intellectual Property India — application 711
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- उत्तर भारत की दुकानों के लिए ब्रांडेड पैक साबूदाना
- काग़ज़, कपड़ा और खाद्य उद्योग के लिए संशोधित स्टार्च
- पकाने को तैयार साबूदाना उत्पाद (खिचड़ी मिक्स, पापड़)
- अपशिष्ट जल शोधन और गंदे पानी से बायोगैस
क्लस्टर की मुश्किलें
- टैपिओका के दामों में उतार-चढ़ाव और मीलीबग कीट
- प्रोसेसिंग इकाइयों के गंदे पानी से प्रदूषण
- मिलावट की शिकायतों से भरोसा घटा
- सस्ते आयातित स्टार्च से मुक़ाबला
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
कम्पोस्टेबल स्टार्च थैला निर्माण →पापड़ बनाना →फ्रायम्स (चावल के पापड़/वेफ़र) →
