कहानी
1970 और 1980 के दशक में नहर और लिफ़्ट सिंचाई से तासगाँव, मिरज और कवठे महांकाळ तालुकों में अंगूर के बाग़ फैले। ताज़ा अंगूर जल्दी ख़राब होते हैं और कटाई के समय दाम गिर जाते हैं, इसलिए किसान छायादार शेड में उन्हें सुखाकर किशमिश बनाने लगे, और तासगाँव पूरे साल बिक्री के लिए कोल्ड स्टोर वाला बड़ा किशमिश बाज़ार बन गया। सांगली किशमिश को 2016 में GI टैग मिला।
आँकड़ों में
किशमिश क्लस्टर, मिरज (सांगली) में 138 चालू इकाइयाँ, ₹150 करोड़ का कारोबार, ₹80 करोड़ का निर्यात और 2,000 लोगों को रोज़गार था।
Brief Industrial Profile of Sangli District, MSME-DI (Ministry of MSME) · 2012सांगली किशमिश पंजीकृत GI है (आवेदन संख्या 490, प्रमाणपत्र संख्या 263, दिनांक 18-05-2016); आवेदक महाराष्ट्र राज्य द्राक्ष बागायतदार संघ, सांगली है।
GI Registry (IP India) – Application No. 490, Sangli Raisins · 2016
GI टैग
- Sangli Raisinsआवेदन संख्या GI Application No. 490, Certificate No. 263 (18-05-2016)GI Registry (IP India) – Application No. 490, Sangli Raisins
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- किशमिश की ग्रेडिंग, धुलाई और ब्रांडेड पैकिंग
- किशमिश के लिए कोल्ड स्टोरेज क्षमता
- GI टैग वाली किशमिश की ऑनलाइन और निर्यात बिक्री
- सुखाने के शेड बनाना और सुखाने के तेल की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- सुखाने के समय बारिश और नमी
- सुखाने के तेल का उपयोग और अवशेष की सीमा
- ज़्यादा आपूर्ति पर दाम गिरना
- कटाई के समय मज़दूरों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
किशमिश बनाना →कोल्ड स्टोरेज (आलू, 2000 टन) →कोल्ड रूम (2 × 10 MT) फल-सब्ज़ी के लिए →
