कहानी
त्रिशूर के सुनार लंबे समय से केरल की शादियों और मंदिर उत्सवों के लिए गहने बनाते आए हैं। 1970 के दशक से शहर के आसपास कई छोटी निर्माण इकाइयाँ बनीं, जो केरल और बाहर के सुनारों के लिए जॉब-वर्क पर गहने बनाती हैं। भारत की कई बड़ी आभूषण खुदरा शृंखलाएँ त्रिशूर से शुरू हुईं। शहर में अब कारीगर वर्कशॉप, थोक डीलर और बड़े शोरूम साथ-साथ हैं।
आँकड़ों में
2024 की एक कार्रवाई में केरल GST अधिकारियों ने त्रिशूर के सुनारों के बिल और कर में गड़बड़ियाँ पाईं और लगभग 100 किलो सोना ज़ब्त किया।
GST department launches biggest ops in Kerala, seizes 100 kg gold from Thrissur jewellers — South First · 2024
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- खुदरा शृंखलाओं के लिए जॉब-वर्क निर्माण
- हॉलमार्किंग, जाँच और CAD/CAM गहना डिज़ाइन सेवा
- हल्के गहने और लैब में बने हीरे के गहने
- सुनारों के लिए प्रशिक्षण संस्थान
क्लस्टर की मुश्किलें
- सोने के दामों में उतार-चढ़ाव और कार्यशील पूँजी की ज़रूरत
- कर अनुपालन की जाँच
- दूसरे राज्यों के मशीन से बने गहने
- बूढ़े होते कारीगर और प्रवासी मज़दूर
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हस्तशिल्प आभूषण इकाई →चश्मे के फ़्रेम और आभूषणों पर सोने की परत (जॉब वर्क) →कृत्रिम (आर्टिफ़िशियल) गहनों की दुकान →
