कहानी
कोल्लम का काजू उद्योग 1920 के दशक में शुरू हुआ, जब व्यापारी कोल्लम बंदरगाह के रास्ते पूर्वी अफ़्रीका से आए और स्थानीय कच्चे काजू प्रोसेस करने लगे। छिलका तोड़ने और छीलने का काम बड़े कारखानों में हाथ से होता था, जिसमें ज़्यादातर महिलाएँ काम करती थीं। कस्बा भारत का काजू निर्यात केंद्र और काजू निर्यात संवर्धन परिषद का मुख्यालय बना। बढ़ती लागत और प्रसंस्करण के दूसरे राज्यों और देशों में जाने से 2010 के दशक से कई कारखाने बंद हुए।
आँकड़ों में
अपने चरम पर केरल की लगभग 830 औपचारिक और अनौपचारिक काजू इकाइयों में लगभग 3,00,000 लोग काम करते थे, जिनमें 90% महिलाएँ थीं; अब केवल लगभग 100 इकाइयाँ चालू हैं, जिनमें लगभग 1,00,000 मज़दूर हैं।
Kerala's once-thriving cashew industry pins its hopes on replanting and state-backed revival — South First · 2025केरल राज्य काजू विकास निगम 30 कारखाने चलाता है और 2023-24 में उसे ₹105.99 करोड़ का घाटा हुआ।
Kerala's once-thriving cashew industry pins its hopes on replanting and state-backed revival — South First · 2025ऊँची परिचालन लागत के कारण दो साल में कोल्लम की 80 प्रतिशत से अधिक काजू इकाइयाँ बंद हुईं, जिससे 3.5 लाख लोग बेरोज़गार हुए, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत महिलाएँ थीं (2018)।
In 2 years, 80% cashew producing units closed in Kollam — Down To Earth · 2018
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- मूल्य-वर्धित काजू उत्पाद: स्वाद वाले, भुने, काजू बटर
- घरेलू बाज़ार के लिए ब्रांडेड पैक
- काजू छिलका तेल (CNSL) निकालना
- काजू फल से जूस, सिरप और दूसरे उत्पाद
क्लस्टर की मुश्किलें
- दूसरे राज्यों और वियतनाम की तुलना में ऊँची मज़दूरी और प्रसंस्करण लागत
- आयातित कच्चे काजू पर निर्भरता
- कारखाने बंद होने से महिला मज़दूरों की नौकरियाँ गईं
- सरकारी कारखानों का घाटा
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
काजू प्रसंस्करण →काजू छिलका तेल (CNSL) →काजू फल (कैश्यू एप्पल) सिरप →भुने हुए सूखे मेवे →
