कहानी
इडुक्की की इलायची पहाड़ियों में सदियों से जंगल के पेड़ों की छाया में जंगली और खेती की इलायची उगती रही है। बीसवीं सदी में बाग़ान मालिकों और छोटे किसानों ने खेती बढ़ाई, और अब यह फ़सल ऊँचे पहाड़ी इलाक़े की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इलायची केरल के पुट्टडी और तमिलनाडु के बोडिनायकनूर में स्पाइसेज़ बोर्ड की ई-नीलामी से बिकती है। पहले यह एलेप्पी से भेजी जाती थी, इसीलिए GI का नाम ऐसा है।
आँकड़ों में
स्पाइसेज़ बोर्ड के बोडिनायकनूर (तमिलनाडु) और पुट्टडी (केरल) नीलामी केंद्रों ने 2007 में खुली बोली की जगह ई-नीलामी शुरू की और 2021 में क्लाउड-आधारित लाइव ई-नीलामी पर आए।
E-auction — Spices Board Indiaएलेप्पी ग्रीन कार्डमम पंजीकृत GI है (आवेदन 72, प्रमाणपत्र 59), जिसमें केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।
GI Registry — Alleppey Green Cardamom, application 72
GI टैग
- Alleppey Green Cardamomआवेदन संख्या GI Application No. 72 (Certificate No. 59)GI Registry, Intellectual Property India — application 72
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- इलायची सुखाने (क्योरिंग) और ग्रेडिंग की सेवा
- ब्रांडेड इलायची पैक और इलायची पाउडर
- पहाड़ी इलाक़े में बाग़ान पर्यटन और होमस्टे
- बाग़ान मालिकों को कृषि सामग्री और ड्रिप सिंचाई की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- सूखा और लू से पैदावार घटती है
- निर्यात के लिए कीटनाशक अवशेष की सीमाएँ
- नीलामी में दामों का उतार-चढ़ाव
- बाग़ानों में मज़दूरों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हरी इलायची पाउडर →मसाला / स्पाइस ग्राइंडिंग यूनिट →काली मिर्च सफ़ाई और पिसाई इकाई →
