कहानी
तिरुचेंगोडे के मिस्त्री पहले बैलगाड़ियाँ और फिर लॉरी की बॉडी बनाते और सुधारते थे। जब दक्षिण भारत के सूखे इलाक़ों के किसान गहरे बोरवेल खुदवाने लगे, तो स्थानीय वर्कशॉप ने लॉरी पर ड्रिलिंग रिग और कंप्रेसर लगाना सीखा। कस्बे के रिग मालिक अब अपनी मशीनें लेकर पूरे भारत और विदेश में कुएँ खोदते हैं। इस क्लस्टर में रिग असेंबली, फ़ैब्रिकेशन और रिग चलाने वालों का बड़ा समुदाय है।
आँकड़ों में
एक शोध अध्ययन तिरुचेंगोडे को लॉरी बॉडी और बोरवेल रिग असेंबली में विशेषज्ञ औद्योगिक इलाक़ा बताता है, जहाँ के एक निर्माता की रिग पूरे अफ़्रीका में निर्यात होती हैं।
From Ox-Carts to Borewell Rigs: Maintenance, Manufacture and Innovation in Tiruchengode — HAL
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- रिग मस्तूल, प्लेटफ़ॉर्म और टूल बॉक्स का फ़ैब्रिकेशन
- ड्रिल-बिट, हैमर और रॉड का व्यापार
- बोरवेल खुदाई और भूजल सर्वे सेवा
- रिग रखरखाव और कंप्रेसर ओवरहॉल
क्लस्टर की मुश्किलें
- भूजल दोहन के नियम और कुछ इलाक़ों में खुदाई पर रोक
- डीज़ल का ऊँचा ख़र्च
- रिग कर्मचारियों की लंबी यात्राएँ
- रिग ख़रीद में भारी कर्ज़
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सटीक शीट-मेटल फ़ैब्रिकेशन (जॉब शॉप) →इंजीनियरिंग वर्कशॉप (जॉब वर्क और मरम्मत) →हैंडपंप निर्माण →
