कहानी
वरंगल में दरी बुनाई काकतीय काल से चली आ रही है, और शहर का कोठवाड़ा इलाक़ा इसका केंद्र बना। बुनकर गड्ढा और फ़्रेम करघों पर ज्यामितीय और प्राकृतिक नमूनों वाली सपाट बुनी सूती दरियाँ बनाते हैं। पिछले कुछ दशकों में कई इकाइयाँ निर्यात ख़रीदारों और होम-फ़र्निशिंग ब्रांडों के लिए बुनती रही हैं। वरंगल दरियों को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
यूनिडो (UNIDO) ने वरंगल की हथकरघा दरियों को तकनीकी उन्नयन के लिए चुने गए क्लस्टरों में रखा।
Andhra Pradesh State Industrial Profile 2014-15 (MSME-DI Hyderabad, DC-MSME) · 2015
GI टैग
- Warangal Durriesआवेदन संख्या GI application no. 523Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- दरियों का निर्यात और ऑनलाइन बिक्री
- होम-फ़र्निशिंग ब्रांडों के लिए बुनाई का जॉब-वर्क
- धागा रंगाई सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- पानीपत और मशीन से बने ग़लीचों से प्रतिस्पर्धा
- बुनकरों की कम मज़दूरी
- कुछ ही निर्यातकों पर निर्भरता
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ऊनी दरी बुनाई →सूती धागे की रंगाई (लच्छी और पैकेज रंगाई) →कपड़े के मेड-अप्स (नैपकिन, मैट, एप्रन) →
