कहानी
होसूर को 1970 के दशक में SIPCOT ने तमिलनाडु–कर्नाटक सीमा पर बेंगलुरु के पास औद्योगिक शहर के रूप में बसाया। अशोक लेलैंड और टाइटन ने SIPCOT क्षेत्र में कारखाने लगाए और TVS ने यहाँ अपना मुख्य दोपहिया कारखाना बनाया। इनके आसपास हज़ारों छोटी इंजीनियरिंग इकाइयाँ बनीं। हाल के वर्षों में एथर, ओला इलेक्ट्रिक और सिंपल एनर्जी जैसी बिजली वाहन कंपनियों ने नए कारखाने जोड़े हैं।
आँकड़ों में
होसूर में 3,000 से अधिक विविध सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं।
On Bengaluru's doorstep, Hosur's meteoric rise — Deccan Herald · 2022होसूर की लगभग 500 से 600 छोटी ऑटो सहायक इकाइयाँ अशोक लेलैंड और TVS पर निर्भर हैं।
Hosur vendors take charge of their destiny — Autocar Professionalइंजीनियरिंग क्लस्टर, होसूर और प्रिंट एंड पैक उत्पाद क्लस्टर, होसूर MSE-CDP के पूरे हुए साझा सुविधा केंद्रों में दर्ज हैं।
Completed Common Facility Centres under MSE-CDP (as on 22 Mar 2024), Office of DC-MSME · 2024
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- OEM आपूर्तिकर्ताओं के लिए मशीनिंग, शीट-मेटल और प्लेटिंग जॉब-वर्क
- बिजली वाहन की बैटरी, मोटर और चार्जर के पुर्ज़े
- टूल रूम और फ़िक्स्चर बनाना
- औद्योगिक आवास, कैंटीन और लॉजिस्टिक्स
क्लस्टर की मुश्किलें
- बिजली कटौती और इस्पात के दाम छोटे विक्रेताओं को चोट पहुँचाते हैं
- कुछ वाहन कंपनियों पर निर्भरता
- बिजली वाहनों से पुर्ज़ों की माँग बदल रही है
- बेंगलुरु के पास ट्रैफ़िक और ज़मीन के दाम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
दोपहिया इंजन सिलेंडर ढलाई →मोटरसाइकिल चेन बनाना →ऑटोमोबाइल साइलेंसर निर्माण →वाहन सिलिंडर लाइनर ढलाई और मशीनिंग →शीट मेटल डाई बनाने का टूल रूम →CNC इंजीनियरिंग वर्कशॉप (बारीक जॉब वर्क) →
