कहानी
कोल्हापुर ज़िला पंचगंगा और कृष्णा घाटियों में है, जहाँ काली मिट्टी और नहर के पानी से गन्ने की बड़ी खेती होती है। किसान लंबे समय से छोटी पेराई इकाइयों (गुऱ्हाळ) में खुले कड़ाहों में गन्ने का रस उबालते आए हैं, और कोल्हापुर बाज़ार समिति भारत के मुख्य गुड़ बाज़ारों में से एक बनी। यह गुड़ अपने सुनहरे रंग और स्वाद के लिए जाना जाता है, और इसे 2014 में GI टैग मिला।
आँकड़ों में
गुड़ क्लस्टर, कोल्हापुर (SPV: श्री छत्रपति शाहू सहकारी गुड़ ख़रीद-बिक्री संघ लिमिटेड) में 52 चालू इकाइयाँ थीं; प्लांट और मशीनरी में औसत निवेश ₹25 लाख प्रति इकाई था।
Brief Industrial Profile of Kolhapur District, MSME-DI (Ministry of MSME) · 2012कोल्हापुर गुड़ पंजीकृत GI है (आवेदन संख्या 240, प्रमाणपत्र संख्या 209, दिनांक 31-03-2014); आवेदक कोल्हापुर कृषि उपज बाज़ार समिति है।
GI Registry (IP India) – Application No. 240, Kolhapur Jaggery · 2014MIDC के अनुसार कोल्हापुर, पुणे और सातारा गुड़ और प्रोसेस्ड खाद्य के केंद्र हैं।
MIDC focus sector – Food Processing · 2026
GI टैग
- Kolhapur Jaggeryआवेदन संख्या GI Application No. 240, Certificate No. 209 (31-03-2014)GI Registry (IP India) – Application No. 240, Kolhapur Jaggery
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- FSSAI लाइसेंस के साथ साफ़-सुथरे गुड़ पाउडर और क्यूब की पैकिंग
- शहर और निर्यात ख़रीदारों के लिए जैविक और रसायन-मुक्त गुड़
- मूल्यवर्धित उत्पाद: गुड़ चिक्की, तिल-गुड़, गुड़ सिरप
- गुऱ्हाळ के लिए कम ईंधन वाली भट्ठियाँ और भाप से उबालने वाले प्लांट
क्लस्टर की मुश्किलें
- रंग के लिए रसायनों का उपयोग; खाद्य सुरक्षा जाँच
- गन्ने के लिए चीनी कारख़ानों से होड़
- पेराई के मौसम में मज़दूरों की कमी
- दामों में उतार-चढ़ाव और बरसात में भंडारण का नुक़सान
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
गुड़ बनाना →ब्राउन शुगर निर्माण (छोटी गन्ना इकाई) →बोतलबंद गन्ने के रस का प्लांट →चिक्की बनाना →गजक (तिल-गुड़ की मिठाई) →
