कहानी
लोनावला में चिक्की बनाना 1800 के दशक के अंत में शुरू हुआ, जब बोर घाट पर रेलवे बना रहे मज़दूरों को गुड़ और मूँगफली की मिठाई बेची जाती थी। स्टेशन और पुराने मुंबई–पुणे हाईवे की दुकानों ने इसे मशहूर यात्रा-नाश्ता बना दिया। आज कई पारिवारिक ब्रांड दर्जनों तरह की चिक्की बेचते हैं, और 'लोनावला की चिक्की' पंजीकृत GI है।
आँकड़ों में
'लोनावला की चिक्की' पंजीकृत GI है (आवेदन संख्या 948, दाख़िल 29-08-2022); आवेदक चिक्की ऑफ़ लोनावला एसोसिएशन है।
GI Registry (IP India) – Application No. 948, Chikki of Lonavala
GI टैग
- Chikki of Lonavalaआवेदन संख्या GI Application No. 948GI Registry (IP India) – Application No. 948, Chikki of Lonavala
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ज़्यादा दिन चलने वाली, साफ़-सुथरी स्वचालित चिक्की लाइन
- GI टैग वाली चिक्की की ऑनलाइन और हाईवे आउटलेट बिक्री
- कम चीनी, मिलेट और प्रोटीन वाली चिक्की
- पैकेजिंग और उपहार डिब्बों की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- हाईवे के पास मिलते-जुलते नाम वाले कई ब्रांड
- गुड़ और मूँगफली के दामों में उतार-चढ़ाव
- बरसात में जल्दी ख़राब होना
- ट्रैफ़िक का एक्सप्रेसवे पर जाना, शहर की दुकानों से दूर
