कहानी
मुज़फ़्फ़रपुर की गहरी जलोढ़ मिट्टी, नम गर्मियाँ और बूढ़ी गंडक का मैदान लीची के बागों के लिए उपयुक्त हैं, और ज़िले की शाही किस्म अपनी ख़ुशबू के लिए मशहूर है। 2001 में यहाँ राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र बना। 2018 में 'शाही लीची ऑफ़ बिहार' को GI टैग मिला, और ब्रिटेन व खाड़ी देशों को हवाई निर्यात शुरू हुआ है।
आँकड़ों में
बिहार में 32 हज़ार हेक्टेयर से लगभग 3 लाख मीट्रिक टन लीची पैदा होती है; भारत के लीची उत्पादन में बिहार का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है।
Bihar is the top litchi producing State (PIB release, Ministry of Agriculture) · 2017भारत के लीची उत्पादन में बिहार का हिस्सा लगभग 35% है।
GST Rate Rationalisation: Expanding Opportunities for Bihar (PIB factsheet) · 2025मुज़फ़्फ़रपुर शहद क्लस्टर में 750 से अधिक मधुमक्खी पालक जुड़े हैं।
GST Rate Rationalisation: Expanding Opportunities for Bihar (PIB factsheet) · 2025
GI टैग
- Shahi Litchi of Biharआवेदन संख्या Application No. 552Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- महानगरों तक ताज़ी लीची के लिए प्री-कूलिंग और कोल्ड-चेन
- लीची पल्प, जूस और स्क्वैश इकाइयाँ
- बागों में मधुमक्खी पालन से लीची शहद
- निर्यात के लिए एयर-कार्गो एकत्रीकरण
क्लस्टर की मुश्किलें
- बहुत छोटा तुड़ाई मौसम और जल्दी ख़राब होना
- लू और फल फटना
- कम प्रसंस्करण इकाइयाँ और कमज़ोर कोल्ड-चेन
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मिक्स फलों का जूस और स्क्वैश यूनिट →फल और सब्ज़ी कैनिंग इकाई (आम का गूदा, तरी वाली सब्ज़ियाँ) →मधुमक्खी पालन →शहद प्रसंस्करण और बॉटलिंग प्लांट →कोल्ड रूम (2 × 10 MT) फल-सब्ज़ी के लिए →
