कहानी
नामक्कल का लेयर उद्योग 1970 के दशक में शुरू हुआ, जब कुछ किसानों ने खेती छोड़कर व्यावसायिक अंडा फ़ार्म बनाए। सूखा मौसम, पास के ज़िलों से सस्ता मक्का और लॉरी मालिकों के मज़बूत नेटवर्क से अंडे पूरे दक्षिण भारत तक पहुँचे। किसानों ने दाना मिल, हैचरी और राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति के ज़रिए रोज़ अंडे का दाम तय करने की व्यवस्था बनाई। आज नामक्कल के अंडे केरल, खाड़ी देशों, अफ़्रीका और श्रीलंका जाते हैं।
आँकड़ों में
नामक्कल ज़िला रोज़ लगभग पाँच से छह करोड़ अंडे बनाता है और मध्य-पूर्व, अफ़्रीका और श्रीलंका को निर्यात करता है।
Namakkal poultry industry achieves major leap — exports eggs to US — Deccan Herald · 2025नामक्कल के 1,100 से अधिक पोल्ट्री फ़ार्म भारत के लगभग एक-तिहाई अंडे बनाते हैं; क्रिसमस और नए साल के पास उत्पादन 8 करोड़ प्रतिदिन तक पहुँचता है।
Namakkal eggs turn costly amid water crisis — Inmathi · 2023पानी की कमी से तीन साल में ज़िले का अंडा उत्पादन 30% से अधिक घटा (2023)।
Namakkal eggs turn costly amid water crisis — Inmathi · 20232020 के एक उद्योग पत्र के अनुसार नामक्कल ज़ोन में औसतन रोज़ 3.05 करोड़ (30.50 मिलियन) अंडे बनते थे।
The phenomenal growth of the poultry layer industry in Namakkal — One Health Poultry Hub · 2020
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- लेयर दाना बनाना और मक्का/सोया का व्यापार
- अंडे की ट्रे, कार्टन और कोल्ड-चेन परिवहन
- अंडा पाउडर और प्रोसेस्ड अंडा उत्पाद
- पशु-दवा, टीके और फ़ार्म उपकरणों की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- पानी की कमी से मुर्गियों की संख्या घटती है
- दाने (मक्का और सोया) के दामों में उतार-चढ़ाव
- बर्ड-फ़्लू का डर और निर्यात पर रोक
- खाड़ी बाज़ारों तक शिपिंग में रुकावट
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मुर्गी दाना (पोल्ट्री फ़ीड) इकाई →मुर्ग़ी हैचरी (एक दिन के चूज़े) →ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म →काग़ज़ की लुगदी से अंडा ट्रे बनाना →प्लास्टिक अंडा ट्रे निर्माण →पशु आहार (पेलेट) इकाई →
