कहानी
परंपरा के अनुसार सूफ़ी संत बाबा बुदन सत्रहवीं सदी में यमन से कॉफ़ी के सात बीज लाए और चंद्रगिरि पहाड़ियों में बोए, जिन्हें अब बाबाबुदनगिरि कहते हैं। बाद में अंग्रेज़ बागान मालिकों ने ज़िले की छायादार पहाड़ी ढलानों पर कॉफ़ी बागान फैलाए। कॉफ़ी जंगल की छाया में उगती है और छाया वाले पेड़ों पर काली मिर्च की बेलें चढ़ती हैं। चिकमगलूर अरेबिका और बाबाबुदनगिरि अरेबिका कॉफ़ी को जीआई टैग मिला है, और केंद्रीय कॉफ़ी अनुसंधान संस्थान ज़िले के बालेहोन्नूर में है।
आँकड़ों में
कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा कॉफ़ी उत्पादक है; 2022-23 में यहाँ 2,48,020 मीट्रिक टन कॉफ़ी हुई, इसके बाद केरल और तमिलनाडु आते हैं।
Indian coffee brews global demand with exports reaching $1.29 billion in FY 2023-24 (AgroSpectrum) · 2025
GI टैग
- Chikmagalur Arabica Coffeeआवेदन संख्या GI application no. 606Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Bababudangiris Arabica Coffeeआवेदन संख्या GI application no. 608Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- एक बागान की ख़ास कॉफ़ी भूनकर ऑनलाइन बेचें
- कॉफ़ी क्योरिंग या रोस्टिंग इकाई चलाएँ
- होमस्टे और बागान पर्यटन
- बागानों में उगी काली मिर्च और इलायची का प्रसंस्करण
क्लस्टर की मुश्किलें
- अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन
- बागानों में मज़दूरों की कमी
- विश्व कॉफ़ी दामों में उतार-चढ़ाव
- हाथियों से टकराव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
कॉफ़ी फ़्लेवर्ड दूध (बोतलबंद) प्लांट →कॉफ़ी स्क्रब बनाने की यूनिट →काली मिर्च सफ़ाई और पिसाई इकाई →कृषि-पर्यटन फ़ार्म →
