कहानी
तटीय कर्नाटक में काजू प्रसंस्करण 1920 के दशक में दक्षिण कन्नड़ और उडुपी की लेटराइट पहाड़ियों पर उगे काजू से शुरू हुआ। मंगलूरु बंदरगाह से कच्चा काजू मँगाना और गिरी विदेश भेजना आसान हुआ। कारख़ानों में छिलका उतारने, छीलने और छँटाई के लिए बहुत-सी महिलाएँ काम करती हैं। अब यह उद्योग ज़्यादातर कच्चा काजू अफ़्रीका से मँगाता है।
आँकड़ों में
मंगलूरु क्षेत्र के काजू उद्योग की कुल क्षमता हर साल लगभग 2.5 लाख मीट्रिक टन कच्चे काजू की है, जबकि कर्नाटक में केवल 50,000 से 60,000 मीट्रिक टन काजू उगता है, इसलिए 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक पूर्वी और पश्चिमी अफ़्रीका से आयात होता है (2019)।
KCCI urges govt to give thrust to cashew industry (Deccan Herald) · 2019
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- काजू छँटाई, भुनाई और पैकिंग की छोटी इकाई
- दुकानों के लिए स्वाद वाले काजू स्नैक्स
- काजू छिलके का तेल (CNSL) निकालना
- काजू फल से उत्पाद
क्लस्टर की मुश्किलें
- आयातित कच्चे काजू पर निर्भरता
- वियतनाम और अफ़्रीका से प्रतिस्पर्धा
- मज़दूरों की कमी
- एपीएमसी शुल्क और दामों में उतार-चढ़ाव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
काजू प्रसंस्करण →काजू छिलका तेल (CNSL) →काजू फल (कैश्यू एप्पल) सिरप →
