कहानी
केरल में आयुर्वेदिक वैद्यों और दवा बनाने वाले परिवारों की जीवित परंपरा है। बीसवीं सदी में आर्य वैद्य शाला, कोट्टक्कल जैसे संस्थानों और त्रिशूर की पारिवारिक कंपनियों ने घर में बनी दवाओं को कारखाने के उत्पादन में बदला। त्रिशूर के कुट्टनेल्लूर में सरकारी कंपनी औषधि बड़ा सार्वजनिक निर्माता बनी। कोरट्टी के KINFRA पार्क में आयुर्वेद क्लस्टर सदस्य कंपनियों को साझा उत्पादन और टेस्टिंग सुविधा देता है।
आँकड़ों में
त्रिशूर के कुट्टनेल्लूर में केरल सरकार की कंपनी औषधि लगभग 450 आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूलेशन और 25 पेटेंट व मालिकाना दवाएँ बनाती है।
Oushadhi — largest producer of Ayurvedic medicinesइकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के विश्लेषण (2009) में पाया गया कि केरल का आयुर्वेदिक उद्योग कुल विनिर्माण से कहीं तेज़ बढ़ रहा था।
Commercialising traditional medicine: Ayurvedic manufacturing in Kerala — India Environment Portal (EPW) · 2009
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- आयुर्वेदिक तेलों और फ़ॉर्मूलेशन का ठेके पर निर्माण
- औषधीय पौधों की खेती और कच्ची जड़ी-बूटी की आपूर्ति
- आयुर्वेद वेलनेस केंद्र और रिट्रीट
- हर्बल सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल ब्रांड
क्लस्टर की मुश्किलें
- कच्ची जड़ी-बूटियों की कमी और मिलावट
- GMP और लाइसेंस अनुपालन का ख़र्च
- गुणवत्ता जाँच और निर्यात पंजीकरण की अड़चनें
- बड़े राष्ट्रीय ब्रांडों से मुक़ाबला
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
आयुर्वेदिक शास्त्रीय दवा इकाई (अरिष्ट, चूर्ण, अवलेह) →आयुर्वेदिक औषधीय तेल (तैल) निर्माण →आयुर्वेदिक चूर्ण निर्माण →आयुर्वेदिक गोली (टैबलेट) निर्माण →आयुर्वेदिक वेलनेस रिट्रीट केंद्र →औषधीय पौधों की खेती (कालमेघ, भृंगराज आदि) →जड़ी-बूटी अर्क (एक्सट्रैक्ट) इकाई →
