कहानी
उन्नीसवीं सदी में अंग्रेज़ बागान मालिकों ने पश्चिमी घाट की जंगली ढलानों पर कोडगु में कॉफ़ी बागान खोले। कोडवा परिवारों और बाद में छोटे किसानों ने कॉफ़ी उगाई, साथ में काली मिर्च, इलायची और संतरे भी। भारी मानसूनी बारिश और छाया में खेती से यहाँ की रोबस्टा और अरेबिका कॉफ़ी अलग स्वाद वाली होती है। कूर्ग अरेबिका कॉफ़ी, कूर्ग संतरा और कूर्ग हरी इलायची को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा कॉफ़ी उत्पादक है; 2022-23 में यहाँ 2,48,020 मीट्रिक टन कॉफ़ी हुई, इसके बाद केरल और तमिलनाडु आते हैं।
Indian coffee brews global demand with exports reaching $1.29 billion in FY 2023-24 (AgroSpectrum) · 2025
GI टैग
- Coorg Arabica Coffeeआवेदन संख्या GI application no. 604Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Coorg Orangeआवेदन संख्या GI application no. 33Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Coorg Green Cardamomआवेदन संख्या GI application no. 78Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बागान से कप तक अपना कॉफ़ी ब्रांड
- होमस्टे और बागान पर्यटन
- शहद, मसाला और संतरा प्रसंस्करण
- कॉफ़ी सुखाने, क्योरिंग और ढुलाई की सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- भारी बारिश वाले वर्षों में भूस्खलन और बाढ़
- मज़दूरों की कमी
- छोटे किसानों को कम दाम
- वन्यजीवों से टकराव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
कॉफ़ी फ़्लेवर्ड दूध (बोतलबंद) प्लांट →कॉफ़ी स्क्रब बनाने की यूनिट →हरी इलायची पाउडर →काली मिर्च सफ़ाई और पिसाई इकाई →कृषि-पर्यटन फ़ार्म →
