कहानी
नीलगिरि में चाय की खेती उन्नीसवीं सदी में अंग्रेज़ों के समय शुरू हुई। आज़ादी के बाद हज़ारों बडगा और अन्य स्थानीय परिवारों ने छोटी जोतों पर चाय लगाई और हरी पत्ती बॉट-लीफ़ कारखानों और INDCOSERVE के सहकारी कारखानों को बेचने लगे। कुन्नूर दक्षिण भारतीय चाय का नीलामी केंद्र बना। नीलगिरि ऑर्थोडॉक्स चाय को GI टैग मिला है।
आँकड़ों में
नीलगिरि में 65,000 से अधिक छोटे और सीमांत किसान चाय उगाते हैं; 2026 के सूखे में कुछ कारखानों को रोज़ 4,000 किलो की जगह केवल लगभग 600 किलो पत्ती मिली।
Nilgiris tea production hit by severe drought as green leaf supply plunges — Agro & Food Processing · 2026तमिलनाडु की सहकारी संस्था INDCOSERVE के 16 चाय कारखाने हैं, जिन्हें छोटे उत्पादक चलाते हैं।
Tea prices shoot up, production dips — Onmanorama · 2024नीलगिरि (ऑर्थोडॉक्स) पंजीकृत GI है (आवेदन 116, प्रमाणपत्र 100)।
GI Registry — Nilgiri (Orthodox), application 116
GI टैग
- Nilgiri (Orthodox)आवेदन संख्या GI Application No. 116 (Certificate No. 100)GI Registry, Intellectual Property India — application 116
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- दुकानों और ऑनलाइन के लिए विशेष और बागान-ब्रांड चाय की पैकिंग
- चाय पर्यटन, होमस्टे और चखने के कमरे
- छोटे उत्पादकों के लिए पत्ती संग्रह, परिवहन और कारखाना सेवा
- चाय ब्लेंडिंग और प्राइवेट-लेबल पैकिंग
क्लस्टर की मुश्किलें
- छोटे उत्पादकों को हरी पत्ती का कम दाम
- सूखा और जलवायु परिवर्तन से पैदावार घटती है
- पत्ती तोड़ने के लिए मज़दूरों की कमी
- सस्ती चाय से मुक़ाबला
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
चाय ब्लेंडिंग और पैकिंग इकाई →जैविक ग्रीन और हर्बल चाय की खेती →ग्रीन टी प्रसंस्करण इकाई →मसाला चाय (चाय मसाला) यूनिट →
