कहानी
आणंद खेड़ा ज़िला दूध सहकारी संघ का घर है, जहाँ किसानों ने बिचौलियों के बिना दूध बेचने के लिए संगठन बनाया; यही आगे चलकर अमूल ब्रांड बना। गाँव की समितियों, ज़िला संघों और राज्य महासंघ (GCMMF) का यह मॉडल पूरे गुजरात में फैला और इसने भारत के ऑपरेशन फ़्लड को प्रेरणा दी। आणंद में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान भी हैं।
आँकड़ों में
2024-25 में GCMMF का कारोबार 11% बढ़कर ₹65,911 करोड़ हुआ; अमूल ब्रांड की कुल आय लगभग ₹90,000 करोड़ रही।
Amul brand FY25 revenue rises 12 pc to Rs 90k cr; GCMMF turnover up 11 pc at Rs 66k cr (PTI via The Week) · 2025GCMMF से गुजरात के 18,600 गाँवों के 36 लाख किसान जुड़े हैं, और इसके 18 सदस्य संघ रोज़ 300 लाख लीटर दूध इकट्ठा करते हैं (अप्रैल 2025)।
Amul brand FY25 revenue rises 12 pc to Rs 90k cr; GCMMF turnover up 11 pc at Rs 66k cr (PTI via The Week) · 2025
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- डेयरी फ़ार्मिंग और गाँव की समिति को दूध बेचना
- अमूल पार्लर या वितरक फ़्रैंचाइज़ी
- पशु आहार, चारा और पशु चिकित्सा सेवाएँ
- डेयरी उपकरण सर्विस और कोल्ड चेन
क्लस्टर की मुश्किलें
- चारे और पशु आहार की लागत
- पशुओं का स्वास्थ्य और गर्मी का असर
- निजी डेयरियों से दाम की होड़
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
डेयरी फार्म (गाय / भैंस) →दूध प्रसंस्करण संयंत्र (1,000 लीटर रोज़) →पनीर निर्माण यूनिट →दूध उत्पाद यूनिट (घी, मक्खन, पनीर, मिठाई) →मिल्क पाउडर यूनिट →कोल्ड स्टोरेज (आलू, 2000 टन) →
